The Candid Eye

July 23, 2009

Aurangzeb as per Mughal records

Source: http://www.aurangzeb.info/

Aurangzeb as per Mughal records is a fantastic exhibition that was being shown in many parts of the country, New Delhi, Bangalore and Pune. Video of its inauguration in Bangalore is here. It contains factual history of Aurangzeb as per Mughal records, in form of paintings. When it went to Chennai, the local Muslim groups protested against it being open to exhibition. The Police took quick action of vandalism, destroyed the paintings and arrested women who conducted the exhibit. Isn’t it a barbaric action on the freedom of expression? Is history a toy in hands of rulers to modify, censor it? History has to be presented as it is, the meaning of the word Itihas in Samskrit for the History is “This is how it happened”. The exhibit is set of paintings based on Aurangzeb’s own court cronicles. What objection can you have for such an authentic source of information? If there is objection, it needs to be filed as a court suit and not destroyed forcefully.

The exhibit is available for view online, at this website. The exhibition is put up by FACT India, Foundation Against Continuing Terrorism. FACT India has filed an online petition for compensation for damage and apology.

Some snapshots:-

SomnathDemolition

Demolition of Somnath Temple

Shivaji Maharaj walking away in court of Aurangzeb

Chhatrapati Shivaji Maharaj walking away in court of Aurangzeb

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Bharat ka itihas sikhiye

हमें भारत का इतिहास जानना बहुत जरुरी है | इतिहास जिसे नहीं पता है वह व्यक्ति उस प्रकार से जीता है , जैसे समुन्दर या रेगिस्तान में खोया हुवा मुसाफिर | यह एक व्यक्ति के बारे में कहा जा सकता है, एक पुरे समाज के बारे में क्या कहे? जब कोई समाज उसकी प्राचीन सभ्याताओंको भूल  जाता है, तब उसका अस्तित्व खतरे में आ जाता है|

आज व्यवसायिक शिक्षण को बढ़ावा मिलने की वजह से हमें सिर्फ दसवी कक्षा तक का ही इतिहास  सिखाया जाता है | और १०वि तक हम क्या पढ़ लेते है? जिस प्रकार से हमारे इतिहास का वर्णन किया जाता है, उस प्रकार से हमें यह लगता है की हमारा जीवन हार से भरा हुवा है | मुग़ल, पोर्तुगीज अंग्रेज ये बाहर के देशों से आये और हमारे देश को बंदी बनाये | हर बार हम हारते ही  चले गए  | हमारे लोगों में कोई शौर्य नहीं था | ऐसा एक आभास हमें इतिहास की शिक्षा से मिलता है| यह पूरी तरह से गलत बात है|
भारत वर्ष में योद्धाओंकी और वीरों की कभी कमी नहीं रही है | जब मुग़ल यूरोप और मध्य पूर्व खंडोमे राज्य कर रहे थे तब उनका राज्य भारत में पूर्णतः कभी भी बन नहीं सका | छत्रपति शिवाजी महाराज, राजपूत, इत्यादी राजाओने मुग़ल आक्रामकों को पराजित किया | मुग़ल नाही यहाँ पर अपना वर्चस्व स्थापन कर सके नाही उन्हें यहाँ के लोगों ने अपनाया | मुग़ल आक्रमकोंका जीवन अस्वस्थता , बार बार युद्ध और अन्धरुनी आपसी झगडों से भरा हुवा है | इनके भाईयों ने इनको राज गद्दी के लिए मारा है | अगर ये लोग अपने भाई को राज्य के लिए नहीं छोड़ सकते, तो भला यहाँ की प्रजा का क्या ख्याल करेंगे ? उन्होंने यहाँ सिर्फ जनता की लूटमार की, स्त्रियों की इज्ज़त लूट ली और ऐश आराम में जिंदगी बितायी |
अंग्रेजों के राज्य में यहाँ  बहुत बड़े अकाल हुवे |  वह अकाल किसी नैसर्गिक वजह से नहीं था , अंग्रेजों ने यहाँ इतना जादा लगान वसूल किया , की लोगों को खाने के लिए अन्न नहीं बचा |
ऐसी और भी कई बातें है जो हमें यह खुद को अधार्मिक कहलाने वाले इतिहासकार ठीक से नहीं बताते | अगर इतिहास ठीक से जानना है , तो किसी ऐसे लोंगों से मिलो , जो इस देश से प्यार करते है, जिन्हें इस देश की खुदसे जादा फ़िक्र है |

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